लोकसभा चुनाव में एक साथ आए विपक्षी दलों यानी इंडिया गठबंधन देश की सत्ता में न आ सका हो, लेकिन बीजेपी को बहुमत के आंकड़े से दूर रखने में जरूर सफल रहा. पीएम मोदी को अपने सहयोगी दलों की बैसाखी के सहारे सरकार बनानी पड़ी, लेकिन एक साल के बाद विपक्षी एकजुटता बिखरने लगी है. अरविंद केजरीवाल के बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार इंडिया गठबंधन से दूरी बना रहे हैं तो टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी करीब आती दिख रही हैं.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन की मंगलवार को नई दिल्ली में बैठक हुई. इस बैठक में 16 विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने हिस्सा लिया, लेकिन शरद पवार और केजरीवाल की पार्टी से कोई भी शिरकत नहीं किया. 2024 में इंडिया गठबंधन से दूरी बनाए रखने वाली ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी से सांसद डेरेक ओ ब्रायन बैठक में शामिल रहे. ऐसे में आखिर इंडिया गठबंधन में चल क्या रहा, जो कभी दूर थे वो करीब आ रहे और जो पास थे, वो दूरी बनाते नजर आ रहे?
इंडिया गठबंधन की बैठक में 16 दल के नेता पहुंचे
इंडिया गठबंधन की ऑपेरशन सिंदूर को लेकर हुई बैठक में 16 विपक्षी दलों के नेताओं ने शिरकत की थी. इस बैठक में कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, सपा, शिवसेना (यूबीटी), आरजेडी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, जेएमएम, सीपीएम, सीपीआई, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, आरएसपी, वीएसपी, केरल कांग्रेस, एमडीएमके और सीपीआई माले के नेता शामिल हुए. इन 16 विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया कि पहलगाम आतंकी हमले, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और अमेरिका द्वारा ‘संघर्ष विराम’ की घोषणा किए जाने से जुड़े मुद्दों चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए.
एनसीपी ने अब बनाई इंडिया गठबंधन से दूरी
ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग को लेकर इंडिया गठबंधन की हुई बैठक से विपक्ष के दो अहम दलों ने दूरी बनाए रखी थी, जिसमें एनसीपी और आम आदमी पार्टी है इंडिया गठबंधन के प्रमुख घटक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) ने पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. इंडिया गठबंधन को मूर्तरूप देने वाले नेताओं में शरद पवार का नाम शामिल था. इसके बाद भी शरद पवार बैठक में नहीं पहुंचे, जिसके बाद से सवाल उठने लगे हैं कि क्या एनसीपी(एस) भी इंडिया गठबंधन से बाहर निकलने जा रही है.